सोच को बदलो और ऊँचा उठो | आत्मचिंतन | Sudhanshu Ji Maharaj

सोच को बदलो और ऊँचा उठो | आत्मचिंतन | Sudhanshu Ji Maharaj

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सोच को बदलो और ऊँचा उठो

विचार ही व्यक्ति का मूलभूत आधार है

विचारों के द्वारा ही व्यक्ति ऊंचा भी उठ सकता है और गहरे खाई में भी गिर सकता है! अपने विचारों पर हमें लगातार दृष्टि बनाये रखना आवश्यक है क्योंकि कब कौन सा गलत विचार हमारे पूरे व्यक्तित्व को खराब कर दे, कहा नही जा सकता!

इसलिए अपनी सोच को इतना ऊंचा उठाओ कि आप एक सुंदर जीवन जी सकें। हमारी विचारधारा में सात्विकता प्रवेश कर जाए – क्योंकि सात्विक विचार ही ऊपर उठाने में सहायक हैं अन्यथा नीचे तो गिर ही जाओगे!

एक बार महात्मा बुद्ध के पास कोई डाकू आया और उसने कहा कि मैं सबको जीतने की क्षमता रखता हूँ ,उसकी जान ले सकता हूँ किसी को भी डरा सकता हूँ। महात्मा बुद्ध ने कहा कि सामने पेड़ से पत्ता तोड़कर लाओ- वह ले आया , अब कहा कि इसको दुबारा पेड़ पर लगाकर आओ । उस व्यक्ति ने कहा कि यह असंभव है – बुद्ध ने कहा कि यही मैं तुम्हे समझाना चाहता हूं कि किसी को भी तोड़ना तो बहुत सरल होता है पर जोड़ना असम्भव – जोड़ना ही महानता है।

इसी प्रकार निम्न कोटि के विचार तो आपके अंदर स्वयम ही प्रवेश कर जाएंगे परंतु ऊंची सोच, उच्च विचारधारा लाना कठिन ! जैसे जैसे आप अपनी सोच को ऊंचा उठाते जाओगे , आगे बढ़ते जाओगे ओर एक सुंदर जीवन जी सकोगे ! अपने को आध्यात्म से और सदगुरु से जोड़कर रखो : क्योकि यही वह स्रोत है जहां से विचारों में शुद्धता आती है : दुनिया तो आपको नीचे गिराने में लगी ही रहती है पर आप सावधान, सतर्क रहते हुए निरर्थक विचारों से दूर हटते जाएं !

अपने मार्ग निर्देशक , अपने सदगुरु को हमेशा अपना जीवन सौंप दें, जैसा वह चलाएं, जो निर्देशन दें, उन सबका श्रद्धाभाव से पालन करें, यह श्रेयमार्ग है जो आपको श्रेष्ठता की ओर ले जाएगा – आपकी सोच ही आपका भविष्य निर्माण करती है!
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